मुझे गृहणी बनने से डर क्यों लगता है?

Namrata Mishra is a Gender Culture and Development student from Krantijyoti Savitribai Phule Women's studies Centre
Namrata Mishra

बचपन से ही माँ से सुनते आई हूँ “बड़ी होकर तुझे शादी कर के अपने घर जाना है; वहां तुझे घर बसाना है!” 

यह वाक्य मेरी ही तरह और भी कई लड़कियों को सुनने मिलता है और मिला होगा। कारण यह नहीं कि माँ को उसकी पुत्री से प्रेम नहीं है और इसलिए वह चाहती है की लड़की दूसरे घर चली जाए। परन्तु कारण है शादी करने की मज़बूरी। शादी एक पितृसत्तात्मक ढांचा है और चूंकि हम पितृसत्तात्मक समाज में रह रहे हैं, शादी करना अनिवार्य है। यदि कोई शादी ना करके इस ढांचे को तोड़ने की कोशिश करता है तो, पितृसत्ता के बाकी कई सारे ढांचे लड़ने झगड़ने के लिए तैनात हो जाते हैं। माने, बिना शादी के ना घर ना परिवार ना गली ना मोहल्ला, ना देश ना दुनिया, कोई भी शांति से जीने नहीं देगा। खैर, पित्रसत्ता की समझ तो नारीवाद की क्लासों से आई।

उसके पहले तो बस मां की इन बातों पर या तो रूठ जाती थी या तो गुस्सा हो जाती थी।  मैं सोचती थी की मां ने शादी कर के या मेरे परिवार, रिश्तेदारों में और भी बाकी औरतों ने शादी कर के ऐसा कौन सा आनंद उपलब्ध कर लिया जो मुझसे छूट जाएगा यदि मैंने विवाह ना किया तो..?

Continue reading “मुझे गृहणी बनने से डर क्यों लगता है?”